क्या है Covid 19 का डेल्टा प्लस वैरिएंट? जानें कितना खतरनाक है डेल्टा प्लस।

कोरोना का नया वायरस डेल्टा प्लस बेहद खतरनाक है। यह न सिर्फ शरीर में बनी हुई एंटीबॉडी को खत्म करता है बल्कि फेफड़ों की कोशिकाओं को भी बहुत जल्दी संक्रमित करके मार देता है। ऐसे में चिंता इस बात की होने लगी है कि अगर लोगों को दी गई वैक्सीन के बाद यह वायरस शरीर में प्रवेश करेगा तो क्या वैक्सीन से बनी हुई एंटीबॉडी भी खत्म कर देगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर आईसीएमआर और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने दिशा में अब शोध शुरू कर दिया है।

देश में डेल्टा प्लस की दस्तक के बाद इस पर शोध करने वाले चिकित्सकों ने पाया है कि यह स्वरूप बेहद घातक है। संक्रमित मरीजों पर हुए शोध के बाद पाया गया कि यह वायरस शरीर में बीमारी के खिलाफ बने एंटीबॉडी को बहुत तेजी से खत्म करने लगता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह प्रक्रिया बेहद खतरनाक है। डेल्टा प्लस वैरिएंट के अब तक अपने देश में 40 से ज्यादा नए मामले आ चुके हैं जबकि एक मरीज की मौत भी हो चुकी है। यही वजह है कि आईसीएमआर और नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वॉयरोलॉजी ने मिलकर डेल्टा प्लस पर शोध करना शुरू कर दिया है।

डेल्टा प्लस वेरिएंट डेल्टा का म्यूटेशन से आया है। डेल्टा को भारत में दूसरी लहर में तबाही के लिए जिम्मेदार माना जाता है। डेल्टा प्लस वेरिएंट के केस 11 देशों में मिल चुके हैं और यह अल्फा की तुलना में 35-60 फीसदी अधिक संक्रामक है। आइए जानते हैं डेल्टा प्लस से कितना खतरा है और क्या यह तीसरी लहर के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

क्या है डेल्टा प्लस वैरिएंट?

कोरोना वायरस का डेल्टा वैरिएंट जिसे B.617.2 कहा जाता है, यह म्यूटेंट होकर डेल्टा प्लस या AY.1 में भी तब्दील हो गया है। यह सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में पाया गया है, जिसकी वजह से मेडिकल एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ रही है। डेल्टा वैरिएंट की स्पाइक में K417N म्यूटेशन जुड़ जाने का कारण डेल्टा प्लस वैरिएंट बना है।

यही K417N द. अफ्रीका में पाए गए कोरोना वायरस के बीटा वैरिएंट और ब्राज़ील में पाए गगए गामा वैरिएंट में भी मिला है। ख़ैर, वैज्ञानिक जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिए लगातार नजर बनाए हुए हैं। इसके बारे में ज़्यादा जानकारी जल्द ही सामने आ सकती है।

इसके अलावा K41N नाम का म्यूटेशन जो दक्षिण अफ्रीका में बीटा वेरिएंट में पाया गया था उससे भी इसके लक्षण मिलते हैं। इसलिए यह ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय की मानें तो देश में डेल्टा प्लस वेरियंट के 40 मामले सामने आ चुके हैं। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, जम्मू और कर्नाटक में 40 मामले पाए गए हैं। WHO ने डेल्टा वैरिएंट को ‘वायरस ऑफ कंसर्न’ करार दिया है।

सुपर-स्प्रेडर है डेल्टा प्लस वैरिएंट।

अभी तक जितने भी वैरिएंट आए हैं, डेल्टा उनमें सबसे तेज़ी से फैल रहा है। हालांकि, अल्फा वैरिएंट भी काफी संक्रामक है, लेकिन डेल्टा इससे 60 प्रतिशत ज़्यादा संक्रामक है। डेल्टा से मिलते-जुलते कप्पा वैरिएंट भी वैक्सीन को चकमा देने में कामयाब देखा गया है, लेकिन फिर भी यह बहुत अधिक नहीं फैला, जबकि डेल्टा वेरिएंट सुपर-स्प्रेडर साबित हो रहा है।

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कितना खतरनाक है कोरोना डेल्टा प्लस वैरिएंट?

बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर, जिसने भारत में तबाही मचाई, उसके आने के पीछे डेल्टा वैरिएंट प्रमुख रूप से शामिल था. अब खतरा डेल्टा वैरिएंट के विकसित रूप यानी डेल्ट प्लस वैरिएंट से है. कोरोना की संभावित तीसरी लहर के पीछे यह वैरिएंट प्रमुख रूप से शामिल हो सकता है, इसकी प्रमुख वजह एक्सपर्ट्स द्वारा हाल में जताई गई चिंता है.

भारत के टॉप विषाणु विज्ञानी और INSACOG के पूर्व सदस्य प्रोफेसर शाहिद जमील ने इसपर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि डेल्टा प्लस वैरिएंट वैक्सीन और इम्युनिटी दोनों को चकमा दे सकता है. मतलब वैक्सीन, जिसे अबतक कोरोना से लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा था, अगर डेल्ट प्लस वैरिएंट उसे भी भेदकर अपनी चपेट में ले सकने की ताकत रखता है, तो स्थिति गंभीर होने की आशंका है.

डेल्टा प्लस वेरिएंट के लक्षण।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक डेल्टा प्लस ज़्यादा संक्रामक है और फेफड़े की कोशिकाओं के रिसेप्टर से मज़बूती से चिपकने में सक्षम है। जिसकी वजह से फेफड़ों को जल्द नुकसान पहुंचने की संभावना होती है। यह आपकी इम्यूनिटी को चकमा देने में सक्षम है। जो लोग डेल्टा प्लस वैरिएंट की चपेट में आए हैं, उन्हें गंभीर खांसी-ज़ुकाम और कोल्ड सिम्टम्स पिछले वायरस से काफी अलग पाया जा रहा है। अध्ययन के अनुसार, सिरदर्द, गले में ख़राश और नाक बहना डेल्टा प्लस वैरिएंट से जुड़े सबसे आम लक्षण हैं।

डेल्टा प्लस वैरिएंट से कैसे बचा जाए?

कोरोना वायरस के पिछले सभी वैरिएंट की तरह डेल्टा प्लस वैरिएंट के लिए आपको ज़रूरी सावधानियां ही बरतनी होंगी।

घर से बाहर सिर्फ ज़रूरत पड़ने पर ही जाएं।

जब भी घर से निकलें मास्क ज़रूर पहनें, ख़ासतौर पर डबल मास्क पहनें।

हाथों को दिन में कई बार 20 सेकेंड के लिए धोएं।

लोगों से शारीरिक दूरी यानी 6 फीट की दूरी बनाएं रखें।

घर पर अपने आसपास की जगहों को साफ रखें और डिसइंफेक्ट करें।

बाहर से लाए हर सामान को डिसइंफेक्ट करें।

पिछले वेरिएंट से कितना खतरनाक?

कुछ विषाणु वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि यह वेरिएंट अल्फा की तुलना में 35-60 फीसदी अधिक संक्रामक है।

क्या इस पर वैक्सीन काम नहीं करती है?

भारत के शीर्ष विषाणु विज्ञानी और इंडियन सार्स-कोव-2 जीनोम सिक्वेंसिंग कंसोर्टियम के पूर्व सदस्य प्रोफेसर शाहिद जमील ने कहा है कि डेल्टा प्लस वेरिएंट वैक्सीन और इम्युनिटी दोनों को चकमा दे सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि डेल्टा प्लस में वे सारे लक्षण हैं जो डेल्टा वेरिएंट में थे। साथी ही बीटा वेरिएंट के लक्षण भी इसमें हैं। हमें पता है कि वैक्सीन का असर बीटा वेरिएंट पर कम है। बीटा वेरिएंट वैक्सीन को चकमा देने में अल्फा और डेल्टा वेरिएंट से ज्यादा तेज है। हालांकि, सरकार ने अध्ययनों के हवाले से कहा है कि डेल्टा वेरिएंट पर कोविशील्ड और कोवैक्सीन प्रभावी है।

सरकार और WHO इसे कितना गंभीर मानते हैं?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारतीय सार्स कोव-2 जनोमिक्स कंसोर्टियम के हवाले से डेल्टा प्लस को वर्तमान में चिंताजनक बताया है। दरअसल, वायरस के किसी वेरिएंट तब चिंताजनक बताया जाता है जब वह अधिक संक्रामक हो और गंभीर रूप से बीमार कर सकता है। डब्ल्यूएचओ भी इस पर नजर बनाए हुए है।

क्या यह तीसरी लहर का कारण बन सकता है?

इसको लेकर कोई पुख्ता अध्ययन नहीं हुआ है। लेकिन महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग ने पिछले सप्ताह प्रजेंटेशन दिया था जिसमें कहा था कि डेल्टा प्लस राज्य में कोरोना की तीसरी लहर का कारण बन सकता है।

डेल्टा प्लस ही नहीं लैम्बडा पर भी नजर।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक डेल्टा प्लस ही नहीं बल्कि कोविड वायरस के बदले स्वरूप लैम्ब्डा पर भी उनकी नजर बनी हुई है। नेशनल कोविड टास्क फोर्स की टीम के वैज्ञानिक बताते हैं कि जिस तरीके से पेरू और दक्षिणी अमेरिका के कई देशों समेत दक्षिण अफ्रीका के देशों तक लैम्बडा तबाही मचा रहा है वह बेहद चिंताजनक है। क्योंकि अब तक इस वायरस की संक्रमण दर से दुनिया के हेल्थ एक्सपर्ट को परेशान कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हमें सिर्फ डेल्टा प्लस वैरिएंट से लड़ने की चिंता नहीं करनी है बल्कि लैम्ब्डा जैसे वायरस को रोकना भी हमारी प्राथमिकता में है।

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