मानहानि (Defamation)क्या है? कैसे किया जा सकता है मुक़दमा? जाने सम्पूर्ण जानकारी।

सभ्य समाज में मानव को दिए अधिकारों में मान, सम्मान और ख्याति को भी अधिकार माना गया है। जहां एक ओर भारतीय में संविधान में अनुच्छेद 19 के अंतर्गत वाक्य स्वतंत्रता दी गयी है, वहीं कुछ निर्बंधन भी लगाए गए है। निर्बंधन वह हैं जो हमें व्यक्ति और राज्य की मानहानि करने से रोकते हैं।

पिछले कुछ वर्षों में भारत में मानहानि के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। राजनीतिक नेता एक दूसरे के खिलाफ निराधार कारणों पर मानहानि के मामले दर्ज कर रहे हैं, जिसके उपरांत सामने वाली पार्टी मानहानि का मामला दर्ज करवाती है।

कई जान-बूझकर नकली बयान या तो लिखित या मौखिक, जो किसी व्यक्ति का सम्मान, या आत्मविश्वास कम करता है, या किसी व्यक्ति के खिलाफ अस्वीकार, शत्रुतापूर्ण, या असहनीय राय या भावनाओं को प्रेरित करता है।

उत्तराखंड IMA यानी इंडियन मेडिकल असोसिएशन ने योगगुरु बाबा रामदेव को कानूनी नोटिस भेजा है. इस नोटिस में कहा गया है कि योगगुरु रामदेव एलोपैथी पर दिए अपने विवादित बयान के खंडन का वीडियो जारी करें और IMA से 15 दिनों में लिखित माफी मांगे. ऐसा नहीं करने पर एक हजार करोड़ की मानहानि का केस किया जाएगा.

आइए जानते है मानहानि के बारे में कुछ तथ्य।

क्या है मानहानि?

मान सम्मान और ख्याति को पहुंची हानि को मानहानि कहा गया है। भारतीय विधि में अधिकार देकर मानहानि से व्यक्तियों को बचाने हेतु प्रावधान किए गए हैं।

भारतीय दंड सहिंता की धारा 499 से 502 तक मानहानि के कानून के विषय में प्रावधान किया गया है।

कोई ऐसा बयान, कोई ऐसा डॉक्यूमेंट, कोई ऐसा पब्लिश मटीरियल, जिससे किसी व्यक्ति या किसी संस्था की छवि खराब होती है, ग़लत जानकारी प्रसारित होती है तो मानहानि के तहत केस दर्ज हो सकता है. किसी व्यक्ति को ऐसा लगता है कि उसके ख़िलाफ कोई झूठा आरोप लगाया गया है तो भी वह मानहानि का केस कर सकता है. लेकिन व्यक्ति हो या संस्था, उसे ये बात न्यायालय के सामने साबित करनी होगी कि उसकी मानहानि हुई है.

मानहानि  कितने प्रकार की होती है

 अपलेख(Libel)।

अपलेख के अंतर्गत कथन का किसी स्थायी एवं दिखाई देने वाले रूप में प्रकाशन किया जाता हैं जैसे लिखा हुआ, छापा हुआ, चित्र, फोटो, सिनेमा, फिल्म, कार्टून या व्यंग्य चित्र, पुतला या किसी के दरवाजे पर कुछ लिखकर चिपकाना ऐसे ही रूप में होना चाहिए।यह कहा जाता हैं अपलेख आंखों को सम्बोधित किया जाता हैं। इस प्रकार बोलने वाली फिल्म में मानहानिकारक विषय अपलेख होता हैं।

अपवचन(slander)।

किसी व्यक्ति के प्रति मानहानिकारक वचन के प्रयोग को अपवचन कहते है।सामान्य रूप से अपवचन मौखिक शब्दों, संकेतों अथवा अव्यक्त ध्वनियों द्वारा किया जाता हैं।एवं अपवचन कानों को संबोधित किया जाता हैं।

भारतीय दण्ड संहिता में अपलेख एवं अपवचन दोंनो प्रकार मानहानि को दंडनीय अपराध माना है।

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मानहानि में केस कैसे हो सकते हैं?

मानहानि कितना गंभीर मसला है, इसको इस बात से समझ सकते हैं कि इसमें सिविल और क्रिमिनल यानी दीवानी और फौजदारी दोनों तरह के केस दर्ज हो सकते हैं.

सिविल मानहानि ।

मानहानिके अधिकतर मामलों में सिविल के तहत ही मुकदमा चलता है. इसके तहत जिस व्यक्ति की मानहानि हुई है, वो सामने वाली पार्टी से इसके बदले में आर्थिक मुआवजे की मांग कर सकता है. ये रकम कैसे तय होती है, इस पर अभी हम आगे बात करेंगे. रामदेव पर सिविल मानहानि का केस ही हुआ है.

क्रिमिनल मानहानि ।

अगर व्यक्ति या संस्था को लगता है कि पानी सिर से ऊपर निकल गया है और उसकी मानहानि आर्थिक मुआवजे से भी बड़ी है, तो वह क्रिमिनल केस दर्ज करा सकता है. इसमें दोषी को दो साल तक की सज़ा या अर्थदंड या दोनों हो सकते हैं. पत्रकार प्रिया रमानी ने जब Me Too के तहत पत्रकार और तत्कालीन मंत्री एमजे अकबर पर आरोप लगाए थे तो बदले में अकबर ने रमानी पर क्रिमिनल मानहानि का केस ही किया था.

एक और अंतर है. क्रिमिनल मानहानि भारतीय दंड संहिता की धारा 499 के तहत अपराध है. इसमें पीड़ित को न्यायालय के सामने साबित करना होता है कि उसकी मानहानि हुई है. वहीं सिविल मानहानि कॉमन लॉ के तहत अपराध है. इसमें न्यायालय पुराने फ़ैसलों की नज़ीर सामने रखकर और स्वविवेक से निर्णय सुनाता है.

मानहानि के तत्व।

अपमानजनक टिप्पणी या बयान का होना चाहिए-

टिप्पणी या बयानों का आपत्तिजनक होना चाहिए। क्या आपत्तिजनक है यह न्यायालय द्वारा साक्ष्य और परिस्थितियों के अंतर्गत निर्धारित किया जाएगा।

दूलकाल्हा का मामला भारतीय मानहानि विधि में ऐतिहासिक मामला है। यह प्रकरण स्वतंत्रता के समय का है, जिसमे एक विधवा स्त्री पर उसके भतीजे ने व्यभिचार का आरोप लगाते हुए कहा था कि यह स्त्री के घर से रात दो बजे के बाद एक पुरुष निकला था और अवश्य ही वह पुरुष इससे संभोग करने गया होगा।

आगे मामले को बिरादरी की पंचायत में ले जाया गया, जहां स्त्री को निर्दोष घोषित कर दिया गया। बाद में महिला ने मानहानि के लिए आरोप लगाने वाले व्यक्ति के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करवाया पंरतु न्यायालय ने प्रकरण निरस्त कर दिया और यह माना कि बिरादरी की पंचायत महिला को निर्दोष मान चुकी है, इसीलिए महिला को सम्मान में कोई हानि नहीं हुई तथा वह अभियुक्त को निर्दोष माना गया।

अपमानित करने का आशय (intention) होना चाहिए ।

मानहानि के अंतर्गत आरोपी बनाए जाने के लिए आशय का अत्यंत महत्व है। किसी भी कार्य या लोप द्वारा आशय यह होना चाहिए की व्यक्ति की मानहानि की जाएगी।

अपमानजनक टिप्पणी या बयान अभियोगी को लक्ष्य करके बोलना चाहिए।

बयान या टिप्पणी का प्रकाशित होना पूर्ववर्ती शर्त है, यह अभियोगी के भी किसी और व्यक्ति को भी सूचित होना आवश्यक होता है-

यह महत्वपूर्ण शर्त है इसमें टिप्पणी का प्रकाशित होना नितांत ज़रूरी है।जैसे यदि हमने किसी व्यक्ति को चोर कहा और हमे कहते हुए उस व्यक्ति के सिवाय विश्व भर में किसी अन्य द्वारा सुना न गया या अन्य को संसूचना न हुई तो मानहानि नहीं मानी जाएगी।

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मृत व्यक्ति की भी मानहानि हो सकती है।

धारा के स्पष्टीकरण में मृत व्यक्ति को भी मानहानि का योग्य माना गया है।मृत व्यक्ति के निकटवर्ती नातेदार इसके प्रतिकर के लिए भी मुकदमा ला सकते है।ऐसी टिप्पणी या शब्दो के माध्यम से मृत व्यक्ति के सम्मान और ख्याति को क्षति पहुंचाने का आशय हो तो मानहानि मानी जाएगी।

राज्य के विरुद्ध मानहानि-राज्य के खिलाफ मानहानि भारतीय दंड संहिता की धारा 124 A में निहित है जिसको देशद्रोह (Sedition) कहा जाता है। किसी समुदाय के खिलाफ मानहानि भारतीय दंड संहिता की धारा 153 में निहित है, जिसे  उपद्रव (Riot) कहा जाता है।

धारा के अंतर्गत दस अपवाद रखे गए है।इन अपवादों के अंतर्गत आने वाले मामले मानहानि नहीं माने जाएंगे वह अपवाद निम्न हैं-

अपवाद 1 : सत्य बात का लांछन लगाया जाना या प्रकाशित किया जाना जो लोक कल्याण के लिए उपेक्षित है, मानहानि नहीं है।

अपवाद 2 : उसके लोक कृत्यों के निर्वहन में, लोक सेवक के आचरण के विषय में या उसके शील के विषय में, जहां तक उसका शील उस आचरण से  प्रकट होता न कि उससे आगे, कोई राय, चाहे वह कुछ भी हो, सद्भावपूर्वक अभिव्यक्त करता है मानहानि नहीं है।

अपवाद 3 : किसी लोक कल्याण प्रश्न के सम्बन्ध में किसी व्यक्ति के आचरण के बारे में, और उस के शील के बारे में,  जहां तक उसका आचरण प्रकट होता है न कि उससे आगे कोई राय चाहे वह कुछ भी हो, सदभावपूर्वक अभिव्यक्त करना मानहानि नहीं है।

अपवाद 4 : किसी न्यायालय की कार्यवाहियों या ऐसी किन्हीं कार्यवाहियों के सही रिपोर्ट को प्रकाशित करना मानहानि नहीं है।

अपवाद 5 : न्यायालय में मामले की गुणवत्ता या साक्ष्यों तथा अन्य व्यक्तियों का आचरण को सदभावपूर्वक अभिव्यक्त या प्रकाशित करता है तो मानहानि नहीं है, बशर्ते कि अदालत ने मामला तय कर लिया हो।

अपवाद 6 : किसी ऐसे कृति जो लोक के गुणागुण के बारे में जिसको उसके कर्ता ने लोक निर्णय के लिए रखा सदभावपूर्वक अभिव्यक्त या प्रकाशित करता है मानहानि नहीं है।

अपवाद 7: किसी अन्य व्यक्ति के ऊपर विधिपूर्वक प्राधिकार रखने वाले व्यक्ति द्वारा सदभावपूर्वक की गयी परिनिन्दा मानहानि नहीं है।

अपवाद 8: प्राधिकृत व्यक्ति के समक्ष सदभावपूर्वक अभियोग लगाना मानहानि नहीं है।

अपवाद 9: अपने या अन्य व्यक्ति के हितों की संरक्षा के लिए  किसी व्यक्ति द्वारा सदभावपूर्वक लगाया लांछन मानहानि नहीं है।

अपवाद 10 : सावधानी जो व्यक्ति की भलाई के लिए, जिसे की वह  दी गई है या लोक कल्याण के लिए आशयित हो मानहानि नहीं है।

अगर किसी व्यक्ति द्वारा दिया गया बयान इन स्थितियों में से किसी एक स्थिति में आता है तो वह आदमी मानहानि नहीं करता है तथा वह इस स्थिति में सुरक्षित है।

मानहानि सिविल और आपराधिक दोनों मामले की हो सकती है।जैसे केजरीवाल के मामले में नितिन गडकरी की ओर से दोनों प्रकार से मानहानि के मामले संस्थित किये गए गए थे। एक प्रकरण धारा 500 भारतीय दंड संहिता और दूसरा दीवानी वाद था।दीवानी प्रकरण प्रतिकर प्राप्त किये जाने के लिए किया गया था।

मानहानि के लिए दंड।

भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के अंतर्गत मानहानि के लिए दो वर्ष तक का सादा कारावास और जुर्माना का भी प्रावधान किया गया है। यह असंज्ञेय और जमानतीय अपराध है। साधारण परिवाद द्वारा आपराधिक मामलों को दर्ज किए जाने हेतु मजिस्ट्रेट को संज्ञान दिया जाता है।

कुछ चर्चित केस।

केस 1 – सुपरहिट हॉलीवुड फिल्म ‘पाइरेट्स ऑफ कैरिबियन’ वाले ‘कप्तान जैक स्पैरो’ यानी एक्टर जॉनी डेप के बारे में अख़बार The Sun ने लिखा कि वे अपनी पत्नी को पीटते रहे हैं. डेप ने अख़बार पर मानहानि का केस कर दिया. डेप केस हार गए क्योंकि अख़बार ने जो कुछ लिखा था, वो सही साबित हुआ. कोर्ट ने कहा कि कोई मानहानि नहीं हुई.

केस 2 – 2020 में मॉडल-एक्ट्रेस पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा के बारे में भी टिप्पणियां की थीं. ऋचा ने पायल पर सिविल मानहानि का केस किया. पायल घोष ने ऋचा से माफी मांगी, तब जाकर केस सेटल हुआ.

केस 3 – ‘द वायर’ वेबसाइट ने साल 2017 में एक रिपोर्ट छापी, जिसके मुताबिक- मोदी सरकार आने के बाद अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी ने जमकर आर्थिक तरक्की की. जय शाह ने वेबसाइट और रिपोर्ट लिखने वाली पत्रकार पर 100 करोड़ रुपये की मानहानि का केस कर दिया. लेकिन द वायर ने अपनी रिपोर्ट के पक्ष में आते हुए माफी मांगने से साफ मना कर दिया. मामला लंबित है.

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