Kaushal Kishore biography in Hindi.कौशल किशोर की जीवनी।

मोदी सरकार के कैबिनेट के विस्तार (PM Modi Cabinet Expansion) में 43 मंत्रियों ने शपथ ली. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) ने राष्ट्रपति भवन में बुधवार शाम 6 बजे इन मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. यूपी के कुल सात सांसदों को मंत्री बनाया गया है. मोहनलाल गंज से सांसद कौशल किशोर ने भी मंत्री पद की शपथ ली है. आइए जानते हैं उनके बारे में…. 

कौशल किशोर लोकसभा में संसद के एक भारतीय सदस्य हैं, जो उत्तर प्रदेश के मोहन लालगंज निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह परख महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, और पार्टी के एससी विंग के राज्य अध्यक्ष हैं। वह पार्टी के प्रभावशाली नेता हैं और उन्हें सामाजिक न्याय के मुद्दों से संबंधित अपनी सक्रियता के लिए राष्ट्रव्यापी मान्यता प्राप्त है।

कौन हैं कौशल किशोर?

कौशल किशोर उत्तर प्रदेश के मोहनलाल गंज से लोकसभा सांसद हैं. इसी के साथ वह परख महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पार्टी के एससी विंग के अध्यक्ष हैं. कौशल किशोर एक प्रभावी लीडर माने जाते हैं. साथ ही, सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर वे काफी सक्रिय रहते हैं. इसके लिए वह देश भर में पहचाने जाते हैं.

गैर जाटव दलित के फॉर्मूले में बैठते हैं फिट .

लंबे समय से इस बात का अनुमान लगाया जा रहा था कि भाजपा किसी गैर जाटव दलित चेहरे को मंत्रिमंडल में शामिल कर सकती है. कई नामों की सूची भी आई. लेकिन अब लगता है कि कौशल किशोर बाजी मार सकते हैं. वह पासी समाज से आते हैं. जाटव के बाद यूपी में इनका बड़ा वोट बैंक है. ऐसे में भाजपा इसके सहारे 2022 चुनाव को भी साध सकती है.  दरअसल, भाजपा बसपा से इसे फॉर्मूले पर लड़ती आई है.

ये पद संभाल चुके हैं.

2002-2007: उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य
2003-2004: उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री
मई, 2014: 16वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित
मई, 2019: 17वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित

लखनऊ की सरजमीं से राजनीति करने वाले 61 वर्षीय कौशल किशोर ने समय के साथ खुद को बदला। इसी का परिणाम रहा कि आज उन्हें केंद्रीय मंत्री बनने का मौका मिला। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से राजनीति शुरू करने वाले कौशल किशोर ने 1999 में खुद की पार्टी बनाई। उसका नाम राष्ट्रवादी कम्युनिष्ट पार्टी रखा।

इसका अध्यक्ष शाइस्ता अंबर को बनाया जबकि खुद महासचिव बने। दलित उत्पीडऩ समेत जनहित के मुद्दों पर प्रदर्शन करने वाले कौशल किशोर को मलिहाबाद की जनता ने चुनकर विधानसभा भेजा था। वर्ष 2002 में निर्दलीय विधायक बनने के साथ ही समाजवादी पार्टी को समर्थन देने से उन्हें श्रम राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया लेकिन वह आठ माह की मंत्री रह पाए।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में वह भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें मोहनलालगंज सीट से टिकट दिया और वह सांसद बन गए। वर्ष 2019 में भाजपा ने उन्हें दोबारा टिकट दिया और वह फिर से सांसद बन गए।

निजी जीवन.

पूरा नाम – कौशल किशोर

जन्म तिथि – 25 Jan 1960

जन्म स्थान – बेगरिया, काकोरी, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

पार्टी का नाम – Bharatiya Janta Party

शिक्षा – 12th Pass

व्यवसाय – कृषि 

पिता का नाम – श्री कल्लू प्रसाद

माता का नाम – श्रीमती पार्वती देवी

जीवनसाथी का नाम – श्रीमती जय देवी

संतान – 4 पुत्र 1 पुत्री

राजनीतिक घटनाक्रम।

2014

वह मोहन लालगंज विधानसभा में बसपा के आरके चौधरी को हराकर 16 वीं लोक सभा के लिए चुने गए।

2003 – 2004

उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री का कार्यभार संभाला।

2002 – 2007

कौशल किशोर उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे।

1 सितम्‍बर 2014

गृह मामलों पर स्थायी समिति के सदस्य चुने गए।

1 सितम्‍बर 2014

श्रम और रोजगार मंत्रालय पर परामर्श समिति के सदस्य बने।

गांव में देते हैं लोग उनकी बहादुरी की मिसाल।

लखनऊ के मोहनलाल गंज तहसील के बेगरिया गांव में जन्में कौशल किशोर पासी जाति के किसान परिवार से आते हैं. बचपन में ज्यादा पैसे न होने के कारण किशोर के पास बहुत सीमित साधन थे. पढ़ाई-लिखाई में एवरेज, लेकिन अपनी ईमानदारी और जिज्ञासु दिमाग के लिए कौशल किशोर खूब चर्चित थे.

उनके गांववाले उन्हें बहादुरी की मिसाल मानते हैं. वे कहते थे कि कोई भी कौशल का सामना करने की हिम्मत नहीं कर सकता, क्योंकि वह हमेशा सच और सही के लिए खड़े रहते हैं. 

अन्याय के खिलाफ लड़ जाते हैं कौशल किशोर।

बताया जाता है कि उनके माता-पिता उनकी चिंता में ही रहते थे, क्योंकि कौशल सच की लड़ाई के लिए किसी से भी भिड़ जाया करते थे. वे उन छात्रों के साथ हमेशा खड़े रहते थे, जो कमजोर या किसी भी प्रकार के शोषण और भेदभाव के अधीन थे.

बचपन में जब उनसे पूछा जाता था कि वह खुद लड़ाई को न्योता देकर घरवालों की परेशानी क्यों बढ़ाते हैं, तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता था. लेकिन अब कौशल किशोर कहते हैं कि यह उनकी न्याय की भावना थी जो उन्हें उन लोगों से मुकाबला करने के लिए प्रेरित करती थी. यह भी बताया जाता है कि अगर पिता उनकी माता पर आवाज उठा भी दें तो कौशल उनसे भी रोकते थे. कौशल किशोर अन्याय होते नहीं देख सकते थे.

किसानों की मदद के लिए छोड़ दी पढ़ाई।

लखनऊ के कालीचरण इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद कौशल किशोर ने C.R. Degree College में एडमिशन लिया. हालांकि, वह अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके क्योंकि वह पारिवारिक बीमारी, और मजदूरों और किसानों की मदद में शामिल हो गए थे. 

संघर्षों भरा रहा जीवन।

जिस गांव में उनका जन्म हुआ, वहां पक्की सड़क और बिजली की सुविधा नहीं थी. ऐसे में वह अक्सर प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नेताओं के पास जाते थे और इस मुद्दे पर और गांव के उत्थान पर बात करते थे. कौशल किशोर का बचपन काफी संघर्ष भरा रहा.

वह शिक्षा ग्रहण करने के लिए 20 किलोमीटर पैदल जाते थे. साल 1977 में, 12वीं कक्षा में जब उन्हें स्कॉलरशिप मिली, तब जाकर कौशल किशोर ने एक साइकिल खरीदी. अपनी मेहनत और लगन से आज राजनीति में उनका बड़ा नाम है.

कौशल किशोर छह बार हारे विधानसभा चुनाव।

लखनऊ के काकोरी में रहने वाले कौशल किशोर ने पहला चुनाव लखनऊ जिले की सुरक्षित सीट महिलाबाद से 1989 में निर्दलीय के रूप में लड़ा था। लेकिन वह ये चुनाव हार गए। इसके बाद 1991 और 1993 में किस्मत आजमाई, लेकिन यह दोनों चुनाव में भी कौशल किशोर को हार का सामने करना पड़ा।

हालांकि, वोट प्रतिशत बढ़ता गया। कौशल किशोर ने हिम्मत नहीं हारी और आगे बढ़ते गए। 2002 में वे पहले बार जीते और मलिहाबाद से विधायक बने।

यूपी में मुलायम सरकार में बने राज्यमंत्री।

उस वक्त उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। मुलायम सिंह ने कौशल किशोर को श्रम राज्यमंत्री बनाया था। हालांकि, महज 8 महीने बाद ही कौशल किशोर सपा सरकार से अलग हो गए थे। कौशल किशोर ने 2007 में फिर चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा।

2009 में मलिहाबाद के विधानसभा उपचुनाव में भी किस्मत आजमाई, लेकिन मायावती सरकार के समय उनकी हार हुई। 2012 के भी विधानसभा चुनाव में उनकी हार हुई। ये सभी चुनाव कौशल किशोर ने निर्दलीय के रूप में लड़ा।

बीजेपी में आने के बाद लगातार दूसरी बार बने सांसद।

आखिरकार 2013 में कौशल किशोर ने बीजेपी का दामन थाम लिया। 2014 में भाजपा ने मोहनलालगंज की सुरक्षित सीट से कौशल किशोर को चुनाव में उतारा और वह पहली बार सांसद बने। इसके बाद 2019 में लगातार दूसरी बार वह सांसद बने। इस बीच उनकी पारम्परिक सीट मलिहाबाद से 2017 का चुनाव उनकी पत्नी जयदेवी कौशल ने जीता।

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